स्वदेशी आयुर्वेदिक दंत मंजन और पूंजीवादी रसायनिक पेस्ट

1.अगर आप रसायनिक पेस्ट जैसे कोलगेट पेप्सोडेंट के स्थान पर घर में बना आयुर्वेदिक दंत मंजन प्रयोग करते हैं तो आप जैव विविधता को बढ़ावा देते हैं क्योंकि आयुर्वेदिक दंत मंजन में 30 प्रकार की जड़ी बूटियों का प्रयोग होता है यह जड़ी बूटियां विभिन्न प्रकार के पौधों और वृक्षों से से प्राप्त होती हैं |

2.अगर आप आयुर्वेदिक दंत मंजन प्रयोग करते हैं तो आप किसानों को खुशहाल करते हैं क्योंकि यह जड़ी बूटियों किसी किसान के खेत से ही आएंगी। दूसरी तरफ अगर आप रसायनिक पेस्ट का इस्तेमाल करते हैं, तो इनमें किसी की जड़ी बूटी का प्रयोग का प्रयोग नहीं होता रासायनिक पेस्ट में में प्रयोग होने वाले केमिकल जैसे सोडियम लॉरिल सल्फेट आदि बड़े बड़े पूंजीपतियों की खदानों से आते हैं ।

3. आपके आयुर्वेदिक मंजन के मंजन के प्रयोग करने के कारण किसानों को विभिन्न प्रकार की जड़ी बूटियां जैसे नीम तुलसी आदि बीजनी पड़ेगी ।जिससे बहुत सारे जीव जंतुओं का संरक्षण होगा जोकि इन विभिन्न प्रकार के पेड़ पौधों पर निर्भर रहते हैं।

3.आयुर्वेदिक मंजन घर में बनाने पर आप प्लास्टिक का कचरा काम पैदा करते हैं ।

4. घर में बने हुए आयुर्वेदिक मंजन से आप ग्लोबल वार्मिंग खतरे से भी निपट सकते हैं ,क्योंकि आप का आयुर्वेदिक मंजन मंजन विभिन्न प्रकार के पौधों और वृक्षों को बीजने में मदद करता है।

5. आयुर्वेदिक मंजन से आपके बच्चों का भी स्वास्थ्य ठीक रहेगा क्योंकि रसायनिक पेस्ट अगर आपके बच्चों के पेट में चला जाए तो यह घातक हो सकता है इसके विपरीत आयुर्वेदिक मंजन मैं ऐसी कोई समस्या नही है।

6. आयुर्वेदिक मंजन आप घर पर भी बना सकते हैं जबकि रसायनिक पेस्ट आप घर पर नहीं बना सकते।

7. रसायनिक पेस्ट प्रयोग होने वाले घातक रसयन जल को प्रदूषित करते हैं ।जबकि आयुर्वेदिक दंत मंजन में प्रयोग होने वाली जड़ी बूटियां जल को प्रदूषित नहीं करती।

8. रसायनिक पेस्ट आपके मसूड़ों का संरक्षण नहीं करता ।जबकि आयुर्वेदिक दंत मंजन आपके मसूड़ों को मजबूत बनाता है। इसी कारण हमारे पूर्वजों के दांत 80 80 साल तक नहीं झड़ते थे ।आजकल आधुनिक रसायनिक पेस्टो के अत्याधिक प्रयोग के कारण लोगों के मसूड़े जल्दी ही कमजोर हो जाते हैं जिस कारण दांत जलती झड़ने लग जाते हैं|

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