अगर आप वृषारोपन करते हो तो आप देश के विकास के दुश्मन हो ।

अगर आप वृषारोपन करते हो तो आप देश के विकास के दुश्मन हो ।
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क्योंकि
१. वृषों बीजने से आप हवा को शुद्ध कर रहे होते हो जिससे Airpurifier बेचने वाली कंपनीज की बिक्री कम हो जाएगी और देश की जीडीपी कम हो जाएगी ।
२ अगर आप फलदार वृक्ष जैसे अमरूद, आम ,जामुन आदि बीजते हो जिससे कोई गरीब आदमी या आप स्वयं मुफ्त और ताजे फल खा सकते हो तो आप फल बेचने वाली कंपनियों और फ्रूट जूस के नाम पर मीठा पानी बेचने वाली कंपनियों जैसे कि REAL ,Taropicana आदि का प्रॉफिट कम कर रहे हो। इससे शेयर मार्केट में इन कंपनियों के शेयरों के दाम गिर सकते हैं और देश की जीडीपी ,growth कम हो सकती है। इसलिए सरकार कभी फलदार पॊधे नहीं लगती।
३. अगर अब आप जड़ी बूटियों के वृक्ष या पौधे बीजते तो आप Pharma Sector की कंपनियों जैसे Cipla ,Cadila आदि का प्रॉफिट कम कर रहे होते हो ।जिससे यह कंपनियां बंद भी हो सकती है जिससे जिससे देश की ग्रोथ कम हो सकती है ।
४. छायादार वृक्ष जैसे पीपल बरगद आदि बीजने से ग्लोबल वार्मिंग कम होती है ।जिसके कारण एसी बेचने वाली कंपनियों जैसे कि वोल्टास आदि का प्रॉफिट कम हो सकता है। जिससे आपका देश Third world country ,Undevolped country, अविकसित कंट्री ,जैसे देशों की सूची से बाहर नहीं आ सकता
५. इसके विपरीत अगर आप वृक्ष काटते हो तो आप आपके देश की जीडीपी एकदम बढ़ जाएगी अगर भारत सरकार में अपनी जीडीपी बढ़ानी है तो देश के सारे वृक्ष काट दे देश की जीडीपी 20% हो जाएगी और देश की हवा जहरीली हो जाएगी जिसके कारण आप अधिक बीमार होगी और आप अधिक दवाइयों का सेवन करोगे जिससे देश की जीडीपी और अधिक बढ़ेगी
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यह जीडीपी का प्रोपेगेंडा पूंजीवादी Information Warfare की आंकड़ों की बाजीगरी है ,और कुछ भी नहीं। पूंजीवादी कंपनीज की आमदन के बढ़ने को विकास ,GDP Growth कहते हैं ।
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पूंजीवादी व्यवस्था, वह व्यवस्था है जो कि देश के सारे संसाधन और धन लूटकर चंद व्यक्तियों तक सीमित कर देती है। इसके विपरीत सनातन अर्थव्यवस्था यह यकीनी बनाती है कि देश के संसाधनों और धन की समान बांट हो। सनातन मॉडल को और अधिक जानने के लिए हमारा ब्लॉग पढ़े

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