पूंजीवादी अर्थव्यवथा DIVERSITY को क्यों समाप्त करना चाहती है

पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में diversity का कोई स्थान नहीं हैं। आजकल जो गागोरियन कैलेंडर चल रहा है वह पूंजीवादी व्यवस्था ग्लोबलाज़ेशन को शूट करता है । पूंजीवादी व्यवस्थाएं diversity की दुश्मन क्यों हैं इसको एक उदाहरण के माध्यम से समझते हैं । क्योंकि महिलाओं के भारतीय परिधानों का नाप एक जैसा नहीं होता इसलिए पूंजीवादी रेडीमेड कंपनीज यहां पर सफल नहीं हो सकती । इन्हीं भारतीय परिधानों के कारण भारतीय दर्जी बचे हुए हैं । पूंजीवादी अर्थव्यवस्था की मुख्य अवधारणा है mass production by limited number of units . लेकिन mass production के लिए चाहिए uniformity । इसलिए यह आजकल जो गेगोरियन कैलेंडर चल रहा है उसका विज्ञान से कुछ लेना देना नहीं । बड़ी कंपनीज को यह कैलेंडर शूट करता है । यह मुख्यता एक बिजनेस कैलेंडर है 

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