1967 तक देश में jury system था । जज के साथ 10 12 स्थानीय लोगों की ज्यूरी बैठा करती थी । न्याय देने का अधिकार ज्यूरी के हाथो में होता था । Rustam फिल्म में आप देख सकते हैं । फिर पता नहीं क्या हुआ ज्यूरी सिस्टम को हटा दिया । अब फैसला केवल जज के हाथ में है । अगर जज को खरीद लो तो फ़ैसला आपके हक में हो जाता है । इंग्लिश में कहावत है Power corrupts Absolute Power corrupts Absolutely . अब जज के हाथ में absolute power आ गई है इसलिए अदालतों में अब बिना रिश्वत के फैसला भी नहीं होता । सनातन भारत वैसे तो सनातन न्याय व्यवस्था का पक्षधर है । जिसमे सबको त्वरित और निशुल्क न्याय दिया जाता था । लेकिन सरकार अगर सनातन न्याय व्यवस्था नहीं लगा सकती तो ज्यूरी सिस्टम को पुनः Restore करना चाहिए । सरकार के कान खोलने के लिए बता दुं कि जिस मुआशरे (देश) में लोगों को इंसाफ नहीं मिलता वह ज्यादा देर चल नहीं सकता । सनातन न्याय व्यवस्था विस्तार से फिर कभी
घर की निकाली हुई देशी दारू vs पूंजीवादी बोतलबन्द शराब
1. देशी दारू पिते में गर्मी नही बढ़ाती जबकि पूंजीवादी बोतलबन्द शराब पिते में गर्मी उत्तपन्न करती है । जिस कारण उच्च रक्तचाप high bp की समस्या हो सकती है। 2.घर की बनी देशी दारू में जड़ी बुटियां डाली जाती हैं । जैसे गुड़ ,सौफ आदि । यह एक तरह की औषधि है । पहले जिस व्यक्ति को जो रोग होता था वह उस तरह की औषधि डालकर देशी दारू तैयार करवा लेता था । जैसे मान लो किसी व्यक्ति को sex संबन्धी सममस्या है तो वह सफेद मूसली आदि डालकर घर में देशी दारू निकाल लेता था । जिसका दिल कमजोर होता था । वह अर्जुन छाल डालकर दारू तैयार कर लेता था। ओषधीय गुण होने के कारण इसको दारू कहा जाता था । क्योंकि यह नशा इसका sideeffect था इसलिये इसको रत्रि को प्रयोग किया जाता था । 3. दुसरी तरफ पूंजीवादी बोतलबन्द शराब में किसी भी तरह की औषधि का प्रयोग नही किया जाता । इसमे हानिकारक chemical का प्रयोग किया जाता है । जो बोतलबन्द शराब आप 200 रुपये की लातें हैं उसमे raw material अधिक से अधिक 2 से पांच रुपये का होता है बाकि सब tax ,profit ,transportation ,पैकिंग ,रिश्वत आदि में निकल जाता है । पांच रुपये में तो कोई आपको औषधि सूंघने नही दे...
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