अचार हमेशा घर में बना हुआ ही खाना चाहिए
क्योंकि
1. बाज़ार के अचार में सरसों का तेल , मेथे और दूसरी औषधियों जैसे सौंफ ,जीरा ,हल्दी ,सेंधा नमक ,राई , कलौंजी आदि के स्थान पर गंदे और तेज केमिकल ,तेजाब आदि का प्रयोग किया जाता है । जो शरीर के लिए लाभदायक कम , हानिकारक अधिक है ।
2. बाज़ार में मिलने वाला अचार देखने में गंदा होता है । जबकि घर में बना हुआ अचार देख देख कर मन नहीं भरता ।
3. बाज़ार में मिलने वाला अचार गंदे प्लास्टिक में पैक किया जाता है जब कि सनातन स्वदेशी घर का अचार वैज्ञानिक चीनी मिट्टी के बर्तनों में रखा जाता है । यह वैज्ञानिक चीनी मिट्टी के बर्तन अचार के साथ कोई भी रसायनिक क्रिया नहीं करते इसलिए अचार एक औषधि बन जाता है।
4. घर बने हुए अचार में से सुंगध आती है । जबकि गंदे और तेज केमिकलों के कारण branded आचार से बदबू आती है ।
5. घर में बने हुए अचार में आप उच्च गुणवत्ता के आम , नींबू ,पीसा , डेला , अंबला ,गाजर ,गोभी ,शलगम , मिर्च , अदरक ,लहसुन , सरसों ,और अन्य औषधियों का प्रयोग करते हैं जबकि बाजार में मिलने वाले ब्रांडेड और नॉन ब्रांडेड आचारों में घटिया क्वालिटी के अवयवों का प्रयोग किया जाता है।
6. घर के बने हुए अचार और मुराबों के बारे में सोच कर ही मुंह में पानी आ जाता है।
7. घर में बने हुए अचार के प्रयोग से आप उस प्लास्टिक के प्रयोग को भी अलविदा कह सकते हैं। जिस प्लास्टिक के कारण सारी दुनिया और जीव जंतु खत्म होने के कगार पर पहुंच गई है।
8. घर में बना हुआ अचार का लागत मूल्य बाजार में आने वाले गंदे आचारों की लागत मूल्य से कहीं कम होता है।
9.अगर आप अपने घर में अचार बनाना शुरू करते हैं तो आने वाली पीढ़ी में आप वहां संस्कार और विद्याएं रोपित करते हैं ,जो हमारे पूर्वजों और महा ऋषि मुनियों ने हमको सिखाई हैं और यह ज्ञान हम तक पहुंचा है। अगर हम इस ज्ञान को अपनी आगे अपनी आने वाली पीढ़ी तक नहीं पहुंचा सके तो ,इससे बड़ा अपराध कोई नहीं होगा ।इसलिए आज ही अपने घर पर अचार बनाएं और अपने बच्चों और अपने परिवार को अपने पूर्वजों की इस धरोहर का उपहार दें।

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